भिंडी की खेती कैसे करें? (Bhindi ki Kheti ki Puri Jankari)
भिंडी भारत की एक प्रमुख सब्जी है जिसकी मांग पूरे साल बनी रहती है। अगर सही तकनीक और उन्नत किस्मों के साथ इसकी खेती की जाए, तो किसान कम लागत में लाखों का मुनाफा कमा सकते हैं। भिंडी की खेती एक मुनाफे का सौदा है, बस जरूरत है सही समय पर सही तकनीक अपनाने की। यहाँ प्रति एकड़ के आधार पर भिंडी की खेती की पूरी जानकारी दी गई है:
1. उपयुक्त जलवायु और मिट्टी:
भिंडी एक गर्म जलवायु वाली फसल है।
तापमान: इसके पौधों के विकास के लिए 25°C से 35°C का तापमान सबसे अच्छा होता है।
मिट्टी: जल निकासी वाली बलुई दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त है। मिट्टी का pH मान 6.0 से 6.8 के बीच होना चाहिए।
2. बुवाई का समय और तरीका:
भिंडी मुख्य रूप से दो सीजन में लगाई जाती है:
जायद (गर्मी): फरवरी से मार्च के अंत तक।
खरीफ (बरसात): जून के अंतिम सप्ताह से जुलाई तक।
दूरी (Spacing) लाइन से लाइन: 45 से 60 सेमी (1.5 से 2 फीट)।
पौधे से पौधा: 15 से 20 सेमी।
गहराई: बीज को 2-3 सेमी की गहराई पर बोएं।
बीज की मात्रा: गर्मी के लिए 5-7 किलो प्रति एकड़ और बरसात के लिए 4-5 किलो प्रति एकड़ बीज पर्याप्त है।
खेत की तैयारी: खेत को 2-3 बार जोतकर मिट्टी को भुरभुरा कर लें और प्रति एकड़ 8-10 टन गोबर की खाद मिलाएं।
3. उन्नत और अधिक पैदावार देने वाली किस्में:
आजकल हाइब्रिड किस्मों का बोलबाला है क्योंकि इनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता अच्छी होती है:
राधिका (Advanta): यह वर्तमान में सबसे लोकप्रिय है। फल गहरे हरे और पैदावार बहुत अधिक।
सिंजेंटा ओहियो (Syngenta OH-102): वायरस के प्रति सहनशील और लंबी अवधि तक फल देती है।नू
हेम्स सम्राट: इसके फल नरम और आकर्षक होते हैं।
अर्का अनामिका: पीला मोजैक वायरस के प्रति काफी प्रतिरोधी।
4. खाद एवं उर्वरक प्रबंधन (प्रति एकड़):
मिट्टी की तैयारी के समय 8-10 टन सड़ी हुई गोबर की खाद जरूर डालें।
उर्वरक का नाम: मात्रा (प्रति एकड़)
DAP 50 किलो बुवाई के समय
MOP (पोटाश) 30 किलो बुवाई के समय
यूरिया 40 किलो दो भागों में (बुवाई के 25 और 45 दिन बाद)
सल्फर 5-10 किलो मिट्टी तैयारी के समय
5. बीज उपचार (Seed Treatment):
बीज जनित रोगों से बचने के लिए उपचार अनिवार्य है:
फफूंदनाशक: बीज को कार्बेंडाजिम (2 ग्राम/किलो बीज) या थायरम से उपचारित करें।
जैविक उपचार: ट्राइकोडर्मा विरिडी (5 ग्राम/किलो) का उपयोग भी कर सकते हैं।
टिप: भिंडी के बीज सख्त होते हैं, इसलिए बुवाई से पहले उन्हें 12 घंटे पानी में भिगोकर छाया में सुखा लें, इससे अंकुरण जल्दी होता है।
6. खरपतवार और बीमारी नियंत्रण:
खरपतवार नियंत्रण: बुवाई के 48 घंटे के भीतर पेंडिमेथालिन (Pendimethalin) 1 लीटर को 200 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। यह बीज को उगने से पहले ही खरपतवार खत्म कर देगा।खड़ी फसल में 20-25 दिन बाद एक निराई-गुड़ाई जरूर करें।
मुख्य बीमारियाँ और समाधान:
पीला मोजैक वायरस (YVMV): पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं। यह सफेद मक्खी से फैलता है।
नियंत्रण: इमिडाक्लोप्रिड (5ml/15 लीटर पानी) या एसिटामिप्रिड का छिड़काव करें।
फल छेदक: फल में छेद कर देता है।
नियंत्रण: कोराजन (Coragen) या प्रोफेनोफॉस का छिड़काव करें।
7. पैदावार बढ़ाने के टिप्स और सावधानियां
सिंचाई: गर्मियों में हर 5-7 दिन में और बरसात में जरूरत अनुसार सिंचाई करें। नमी बनी रहनी चाहिए पर पानी रुकना नहीं चाहिए।क्या गलती न करें: यूरिया का ज्यादा इस्तेमाल न करें, इससे कीटों का हमला बढ़ जाता है।
तुड़वाई: बुवाई के लगभग 45-50 दिन बाद पहली तुड़ाई शुरू हो जाती है।
फलों की तुड़ाई सुबह या शाम के समय करनी चाहिए ताकि वे ताजे रहें। फल जब 3-4 इंच के और नरम हों, तभी तोड़ लें। देरी करने पर फल सख्त हो जाते हैं और बाजार में दाम नहीं मिलता।
स्प्रे: फूल आने की अवस्था में 0:52:34 (Npk) का स्प्रे करने से फूलों की संख्या बढ़ती है।
प्रो टिप: अगर आप बरसात में खेती कर रहे हैं, तो भिंडी को मेड़ों (Beds) पर लगाएं। इससे जलभराव की समस्या नहीं होगी और जड़ें सुरक्षित रहेंगी।


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